बुधवार, 27 मई 2015

युवाओं के खेल में उम्रदराजों का बोलबाला

टी-20 को शुरू से ही युवाओं का खेल कहा जाता रहा है। जब इसकी शुरुआत हुई तो बहुत से सीनियर खिलाड़ियों ने किक्रेट के इस छोटे फॉर्मेट से किनारा कर लिया। 2007 में पहले टी-20 वर्ल्ड में भारतीय टीम से द्रविड़, तेंदुलकर, जहीर खान जैसे सीनियर प्लेयरों ने खेलने से ये कहते हुए मना कर दिया कि ये युवाओं का खेल है। टी-20 को बस युवाओं का ही खेल कहना हास्यास्पद लगता है। 2014के टी-20 वर्ल्ड कप में ऑस्ट्रेलिया ने अपनी टीम में ब्रेड हॉज और ब्रेड हॉग जैसे उम्रदराज खिलाड़ियों का चयन करके सबको चौंका दिया था। मतलब साफ है कि अनुभव और परिपक्वता क्रिकेट के हर फॉर्मेट में काम आता है।
अब बात करते हैं आईपीएल-8 का। इस बार के आईपीएल में जहां कई युवाओं ने बेहतरीन खेल दिखाया तो वहीं उम्रदराज खिलाड़ी भी किसी से पीछे नहीं रहे। आशीष नेहरा (35), ब्रेड हॉग (44), प्रवीण तांबे (43), वीरेंद्र सहवाग (36), माइकल हसी (39), जहीर खान (36), हरभजन सिंह (34), क्रिस गेल (35), इमरान ताहिर (36), अजहर महमूद (40) आदि को प्रमुख रुप से उम्रदराजों की श्रेणी में रखा जा सकता है। वहीं अगर इनके प्रदर्शन की बात की जाए तो जहां कुछ ने तो युवओं को पीछे छोड़ दिया तो कुछ कम मौके मिलने के बावजूद छाप छोड़ने में सफल रहे। इन  खिलाड़ियों में अगर सबसे ज्यादा किसी ने प्रभावित किया तो वो हैं आशीष नेहरा। नेहरा ने आईपीएल के सीजन-8 में 16 मैचों में 20.40 के एवरेज से 22 विकेट झटके। इस तरह सबसे ज्यादा विकेट लेने वालों में नेहरा चौथे स्थान पर रहें, इस दौरान उनका इकोनॉमी मात्र  7.24 रहा जो ऊपर के तीन गेंदबाजों से बेहतर रहा । वहीं आईपीएल के सबसे उम्रदराज खिलाड़ी ब्रेड हॉग ने भले ही 6 मैच खेले हों लेकिन उनके प्रदर्शन ने सबको चौंका दिया। 6 मैचों में 9 विकेट झटकने वाले हॉग ने चेन्नई के खिलाफ एक ही मैच में 29 रन देकर 4 विकेट लिया था। 6 मैचों में हॉग ने मात्र 6.85 के इकोनॉमी से रन खर्च किए। इस बार भी आईपीएल में सबसे छक्के उड़ाने वाले क्रिस गेल को भला कौन भूल सकता है। गेल में इस सीजन में 14 मैचों में 46 के एवरेज से 491 रन में जिसमें उनका सर्वश्रेष्ठ 117 रहा। इस दौरान गेल का स्ट्राइक रेट 147 के ऊपर का रहा जो किसी भी युवा खिलाड़ी को आश्चर्य में डाल सकता है। इसी तरह हरभजन सिंह का प्रदर्शन भी चौंकाने वाला रहा। हरभजन ने 15 मैचों में 24 के एवरेज से न सिर्फ 18 विकेट लिया बल्कि पंजाब के खिलाफ एक मैच में मात्र 19 गेंद में हाफ सेंचुरी भी लगाया । हरभजन के इसी प्रदर्शन को आधार मानकर उनकी भारतीय टेस्ट में वासपी भी हुई। इसी तरह माइकल हसी, वीरेंद्र सहवाग, प्रवीण तांबे, जहर खान ने अपनी टीम के लिए कई बार उपयोगी भूमिका अदा की और अपनी टीम के लिए कारगर साबित हुए।

5 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही साथ्रक लेख। वैसे आपका कहना सही है। युवाओं के खेल में उम्रदराजों का क्‍या काम। सचिन तेंदुलकर भी टांय टांय फिस्‍स न होते, तो वहीं पिच पर टुक टुक कर रहे होते।

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  2. आईपीएल में पैसा, शोहरत और चमक-दमक सब कुछ है. नए खिलाडियों के साथ-साथ उम्रदराज़ खिलाड़ी भी इसका मज़ा ले रहे हैं. उम्रदराज़ खिलाड़ियों ने अपने खेल से यह साबित कर दिया है कि चुस्ती-फुर्ती के इस खेल में अनुभव की भी जरूरत होती है.

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  3. सटीक ... सही बात को पकड़ा है आपने ... अनुभव और जोश ... दोनों का मिश्रण जरूरी है न सिर्फ खेल बल्कि जीवन की हर चुनौती में ...

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  4. बिल्‍कुल सही फरमाया आपने। मेरे ब्‍लाग पर आपका स्‍वागत है।

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